MP बोर्ड रिजल्ट में देरी तय? इंटरनल मार्क्स अपलोड न होने से संकट
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मंडल अप्रैल के दूसरे सप्ताह में रिजल्ट जारी करना चाहता है, लेकिन देरी की आशंका से छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता।
MP बोर्ड ने 29 मार्च 2026 तक इंटरनल मार्क्स अपलोड करने की अंतिम चेतावनी दी, समयसीमा के बाद कोई मौका नहीं दिया जाएगा।
मध्यप्रदेश/ मध्यप्रदेश में इस साल 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम तय समय पर जारी होना मुश्किल नजर आ रहा है। मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने 15 अप्रैल तक रिजल्ट जारी करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन स्कूलों की लापरवाही इस प्रक्रिया में बड़ी बाधा बन रही है। कई स्कूलों ने अब तक छात्रों के प्रायोगिक और आंतरिक मूल्यांकन के अंक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड नहीं किए हैं, जिससे रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
मंडल की ओर से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। नई समयसीमा के अनुसार, 29 मार्च 2026 तक हर हाल में इंटरनल मार्क्स अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले यह अंतिम तिथि 12 मार्च निर्धारित की गई थी, लेकिन अधूरे काम के चलते इसे बढ़ाना पड़ा। मंडल सचिव ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी स्थिति में समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी।
मंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों के इंटरनल मार्क्स समय पर अपलोड नहीं होंगे, उनका रिजल्ट बिना इन अंकों के जारी किया जाएगा। ऐसे मामलों में इंटरनल कॉलम खाली छोड़ दिया जाएगा और बाद में किसी भी प्रकार के संशोधन की अनुमति नहीं होगी। इससे हजारों छात्रों का परिणाम अधूरा रह सकता है, जिसका असर उनके आगे के शैक्षणिक भविष्य पर पड़ सकता है।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए प्रोजेक्ट और प्रैक्टिकल वर्क को शामिल किया गया है। कुल 100 अंकों में से 80 अंक लिखित परीक्षा के होते हैं, जबकि 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित हैं। इन 20 अंकों की जिम्मेदारी पूरी तरह से स्कूल प्रबंधन और प्राचार्यों पर होती है, जिन्हें इसे समय पर ऑनलाइन दर्ज करना होता है।
मंडल अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में अब तक बड़ी संख्या में स्कूलों ने यह कार्य पूरा नहीं किया है। यही वजह है कि रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया में देरी की आशंका बढ़ गई है। इस बीच मंडल की योजना अप्रैल के दूसरे सप्ताह में परिणाम घोषित करने की है, क्योंकि 7 मई से द्वितीय परीक्षा आयोजित की जानी है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर इंटरनल मार्क्स अपलोड नहीं हुए, तो छात्रों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अभिभावकों और छात्रों में भी इस मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ गई है।
फिलहाल, मंडल ने स्कूलों को अंतिम चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि तय समयसीमा का सख्ती से पालन किया जाए। अब सभी की नजर 29 मार्च की डेडलाइन पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि इस साल रिजल्ट समय पर आएगा या नहीं।